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Are we prepared for next Real Estate crisis ?

Posted on 25 September, 2016 at 10:20

क्या शहरी भारत रियल स्टेट के बुलबुले पर सवार है?

हम में से काफी लोगों ने अमेरिका में कुछ साल पहले आई आर्थिक मंदी के बारे में सुना होगा। विशेषज्ञों ने उसका नाम रखा था,SUB PRIME CRISIS एक ऐसी मंदी जिसने लगभग पूरे विश्व को अपने प्रभाव में ले लिया और अमेरिका से लेकर यूरोप तक के बडे-बडे वित्तीय संस्थांन दिवालिया होने की कगार पर आ गये।

पर  क्या हम लोग जानते है कि यह वित्तीय संकट अचानक प्रकट कहां से हो गया। शायद नहीं !

अमेरिकी REAL ESTATE  में आई असंतुलित तेजी इस संकट का मुख्य कारण थी जिसके कुछ लक्षण आज के भारतीय Real Estate Market  से मिलते जुलते है।नीचे कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु है जो अमेरिकी आर्थिक त्रासदी के पहले अमेरिकी समाज में दिखने लगे थे इसकी तुलना आप भारतीय परिवेश से अपने हिसाब से कर सकते है।

1. जरूरत से अधिक उधार:- तेजी के चरम पर ऐसे कई लोगो से आप मिलते है जिन्होने अपनी हैसियत से ज्यादा लोन ले रखा होगा तथा जिनके पास दो-तीन प्रोपर्टीज होगी बैंक लुभावने ब्याज और सुलभ लोन प्रक्रिया की Marketing करके व्यक्तियों को उनकी क्षमता से अधिक लोन मुहैया करवा देते है।

2 संगी साथियों का दबाव:- जब REAL ESTATE का बुलबुला पूरा स्वरूप ले लेता है तो आप पार्टियों में, क्लबों में, रिटेल शाॅप पर, सभी जगह सिर्फ REAL ESTATE की बातें सुनते है। जब हमारा कोई साथी अपनी नई खरीदी प्राॅपर्टी के बारे में बताता है या रिश्तेदार अपने नये फ्लैट की पार्टी देता है तो हम मनोवैज्ञानिक रूप से उस ओर आकर्षित होेने लगते है जो इस तेजी को ओर गति प्रदान करता है।

3 REAL ESTATE की कीमतें न गिरने का भ्रम:- अधिकांश लोग इस भुलावे में रहते है कि REAL ESTATE  की कीमतें  कभी भी नहीं गिर सकती। वे दूसरे उदाहरणों को स्वीकार नहीं करते, वे स्वयं को इस बाजार का Expert समझने लगते है तथा उनकी सोच से अलग कोई सलाह उनके अहंकार को चोट पहुचाती है। ;वास्तविकता में उनकी स्थिति शेयर बाजार की तेजी के दौर में दाखिल हुए नये निवेशक जैसी होती है जिसका हर दाब सही पडता है क्योंकि पूरा शेयर बाजार ऊपर चढ रहा होता है उसकी हर खरीद उसे मुनाफा देती है और वह स्वयं को बाजार का विश्लेषक समझने लगता है।


प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना आवश्यक है कि  Risk - Return  का बहुत पुराना साथ है और हमें इतिहास से सबक लेकर अपने वर्तमान तथा भविष्य की योजनाओं पर विचार करना होगा। आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में हम सभी आपस में जुडे हुये है एक देश दूसरे देश से, एक समाज दूसरे समाज से, अतः जो गलतिया किसी दूसरे देश में हुई उनके प्रति भी हमें सजग रहना होगा तभी हम स्वयं को सम्पन्न तथा विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित कर पायेेंगे।


 

Categories: FINANCIAL PLANNING

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