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What is Fiscal Deficit and How it effects You
| Posted on 18 August, 2016 at 8:55 |
राजकोषीय घाटा क्या है तथा हमें कैसे प्रभावित करता है।

जो लोग अंग्रेजी अखबार पढने के शौकीन है या जो NDTV Profit, Zee Business आदि देखने मे थोडी बहुत दिलचस्पी रखते है वे अमूमन इस शब्द से रूबरू हुए ही होंगे जिसे Fiscal Deficit या हिंदी में राजकोषीय घाटा कहा जाता है।
Fiscal Deficit सरकार द्वारा आय से अधिक खर्चे को दर्शाता है। सरकार की आय के मुख्य साधन Direct तथा Indirect Tax होते है, जब सरकारे इन आय के स्त्रोतो से प्राप्त धन को पूरा खर्च कर लेती है तब वह RBI तथा अन्य माध्यमों से पैसा इकट्ठा करती है।
यहा गौर करने योग्य बात है कि वर्तमान स्थिति में सरकार का 70% खर्चा (Revenue expenditure) में हो रहा है जिसमें सरकारी कर्मचारियों की तन्ख्वाह, कारो के लिये पेट्रोल, बोनस, एसी, सरकारी बंगलो की बिजली का बिल तथा नेताओ तथा बडे अधिकारीयो की सुविधा के लिये किये जाने वाले तमाम खर्चे शामिल है तथा 30% पैसा capital expenditure के रूप में खर्च किया जाता है जिससे सडक, पुल आदि के निर्माण के लिये निदके धनराशी उपलब्ध होती है। पिछले वर्ष हमारे देश का Fiscal Deficit Rs 5.01 lakh crore था।
अब बडा सवाल यह उठता है कि इससे हमारी आम आदमी की जेब पर क्या असर पडता है।
1. महंगाई की मार:- जब सारा पैसा खर्चा करने के बाद सरकारे Reserve बैंक से पैसा लेती है तो इनकी पूर्ति बैंक अधिक नोट छापकर करता है जिससे अधिक मुद्रा/पैसा हमारे बाजारों में आ जाता है जो वस्तुओं की किमतो को तेजी से बढा देता है।
2. महंगे लोन:- जब महंगाई अधिक बढती है तो Bank ब्याज दरे बढा देता है जिससे आम व्यक्ति को अपने लोन पर ज्यादा ब्याज देना होता है।
3. नौकरियों में कटौती:- जब ब्याज दरें बढती है तो बडे औद्योगिक समूह भी बडे हुये ब्याज की वजह से अपने खर्चो में कटौती करते है तथा कर्मचारियों की छटनी इसका एक बढा माध्यम होता है।
सारांश:- अक्सर हम लोग सिर्फ अपने पारिवारिक बजट तथा व्यक्तिगत लाभ-हानि के विषयों पर चर्चा तथा विचार करते है परंतु सरकारी बजट की स्थिति पर ध्यान नहीं देते जबकि हमारी व्यक्तिगत लाभ हानि के पूर्वानुमान लगाने में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। राष्ट्र के घटक होने के नाते राष्ट्रीय समस्याएँ हमारे व्यक्तिगत जीवन पर भी भारी प्रभाव डालती है।
Categories: FINANCIAL PLANNING
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